मन के मोती

कुछ जज्बात जो की कहे नही जाते ,, जिनके बारे में हम सोचते हैं कि वो सिर्फ मेरे साथ है लेकिन वास्तव में सभी उससे खुद को जुड़ा पाते हैं

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मेरी माँ (महिला दिवस विशेष )

Posted On: 7 Mar, 2014 Junction Forum,lifestyle में

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महिला हमारे जीवन में कई रूपों में सामने आती है ! उसका मातृ रूप सबसे सशक्त है ! मेरी माँ मेरे लिए समस्त संसार में सबसे प्रिय हैं ! मैं उनके अपने जीवन में योगदान को शब्दों में नही बता सकता हूँ ! क्या कोई भी शब्द , कोई भी अभिवादन सूचक वाक्य या कोई अन्य आभार प्रकट करने के तरीके से मै इस बात से उऋण हो सकता हूँ कि आज मेरा अस्तित्व उन्ही की वजह से है ? कौन सी ऐसी बात है जो मैंने सीखी हो और उसमे उनका योगदान न हो ? और इस प्रत्युत्तर में मैंने उन्हें क्या दिया ? उनकी आशावों पर अपने सपनों को ही तो आरोपित किया है मैंने अब तक ! मेरे एक एक बड़े सपनों के लिए उन्होंने न जाने कितनी छोटी छोटी खुशियों का त्याग किया ! कितनी बार एक ही गलती को दोहराया है लेकिन उन्होंने क्षमा दान देने में कभी ढिलाई नही की !
मैं उन बातों की कमी साफ़ महसूस करता हूँ ! अब मै बड़ा हो गया हूँ , अब वो मुझे नही डांटती हैं ,, पहले की तरह अधिकार से मारने को भी उद्यत नही होती हैं ! किन्तु गलत बातों को कभी स्वीकार नही किया उन्होंने ! आज समाज में व्याप्त माँ के प्रति उदासीनता से शायद वो संकोच करने लगी हैं कि कहीं मैं भी उन कपूतों कि तरह न व्यवहार करूँ !
वो दृश्य आज भी याद आता है ! मेरा भाई बाहर से खेल के लौटा हुआ है ! मै बरामदे में पढ़ रहा हूँ ! उसका पैर नंगे पड़े तार पर पड़ा और शरीर बिजली के तेज झटकों से काम्पने लगा ! आंगन में माँ कपडे छांट रही थी , कि मेरी चीख सुनके दौड़ी उन्होंने बिना इस बात का परवाह किये कि उनके हाथ भीगे हैं तार को हाथ से ही अलग किया उसके शरीर से ! ये माँ है !
जब भी घर में माहौल खराब होता है , मै झट से जाके उनके पीछे छिप गया हूँ , और एक बार साक्षात् काल भी उनके रक्षण में मेरा बाल भी बांका करने में हजार बार सोचेगा ! उन्हें रोते हुए भी देखा है , उनके लिए मै कुछ भी कर सकता हूँ! मै उनके लिए हजार बार मरने कि इच्छा रखता हूँ बस वो हर बार मेरी माँ हो !
क्या लिखूं , कोई शब्द नही ये औपचारिकता लग रही है इस भाव को प्रकट करने का कोई शब्द नही पर फिर भी मै कोशिश कर रहा था उसी अज्ञानी लड़के कि तरह जो अज्ञानी होते हुए भी खुद को बहुत बड़ा ज्ञानी समझता है !

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13 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    gopesh के द्वारा
    March 12, 2014

    कविता जी ,, आपका हार्दिक आभार ,, और मेरे लिए मेरी माँ के प्रति प्रेम की अक्षुणता की कामना के लिए कोटिशः धन्यवाद

    gopesh के द्वारा
    March 11, 2014

    जी आपका बहुत बहुत आभार ,, आपके लेख हैम सब को प्रेरित करते हैं योगी सारस्वत जी

March 10, 2014

सुन्दर व् सार्थक अभिव्यक्ति .बधाई

    gopesh के द्वारा
    March 10, 2014

    अपना अमूल्य समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद , प्रोत्साहन के लिए आपका धन्यवाद

deepakbijnory के द्वारा
March 7, 2014

आदरणीय गोपेश जी शायद आपको बुरा लगा हो मेरा KAHNA परन्तु आर्टिकल माँ जैसे पावन विषय पर था अतः मैं अपने को न रोक सका सुधर करने कि राइ देने के लिए

    gopesh के द्वारा
    March 7, 2014

    अरे नही दीपक जी , मै ह्रदय से आभारी हूँ मैंने तो जो लिखा था वो बड़ा ही अनर्थकारी था ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद ! मेरे पास आपके लिए शब्द नही जिससे अपना आभार प्रकट करूँ !

gopesh के द्वारा
March 7, 2014

सर्वप्रथम आपको हार्दिक धन्यवाद कि आपने मेरा ब्लॉग पढ़ा एवं मार्गदर्शन के लिए आपका ह्रदय से आभारी हूँ !

deepakbijnory के द्वारा
March 7, 2014

सुंदर प्रस्तुति आदरणीय गोपेश जी एक सुझाव अंत से तीसरी पंक्ति ने में उनके हजार बार मरने के बजाय उनके लिए हजार बार मरने कि लिखिए कृपया पुनः वर्तनी को जांचे

    gopesh के द्वारा
    March 7, 2014

     आदरणीय दीपक जी ,,सर्वप्रथम आपको हार्दिक धन्यवाद कि आपने मेरा ब्लॉग पढ़ा एवं मार्गदर्शन के लिए आपका ह्रदय से आभारी हूँ !


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